मेरा नाम अतुल मौर्य है। मैं 21 साल का हूँ ।आज मै आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हू जो मेरे साथ घटित हुई है ।मैं आशा करता हू की ये कहानी सुन कर आपकी रूह काप जाएगी।
मेरे साथ भी ऐसा ही कुछ डरावना हादसा हुआ था. इस हादसे के बाद मैं तो ठीक था लेकिन मेरा दोस्त पागल हो गया. इस हादसे को पन्द्रह साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी उस भयानक रात का मंजर हमारे जहन में जिन्दा है. बात उन दिनों की है जब हम हायरसेकण्ड्री के लिए गाँव से शहर जाना था।
दरअसल गाँव में सिर्फ दसवीं तक के ही स्कूल थे, आंगे की पढाई के लिए सब को शहर जाना पड़ता था. शहर में रहने के लिए हमें किराये के एक कमरे की जरूरत पड़ती थी, लेकिन हमारे पास ज्यादा पैसे नहीं थे. बहुत सस्ता कमरा ढूंढा, फिर जा कर एक छोटा सा कमरा मिला, लेकिन ये कमरा स्कूल से एक किलोमीटर की दुरी पर था. ये घर कबिर्स्तान में बना हुआ था. उसी में हमें एक कमरा मिल गया था. वैसे तो हमे डर नहीं लगता था, लेकिन मेरे दोस्त को भूतों से खूब डर लगता था।
हम लोगों की रात को पढ़ने की आदत थी और घुमने की भी थी. एक बार क्या हुआ हम लोग रात को कमरे की लाइट जला कर पढ़ रहे थे, तभी हमारे कमरे का दरवाजा किसी ने खटखटाया, जब हम दरवाजा खोलें तो कोई भी न दिखे, ऐसा कई बार हुआ, तो हम लोगों ने दरवाजा भी खोल कर रख लिया और कमरे के बाहर कुर्सी डाल कर पढने लगे, तभी हमारी नजर एक पेड पर पड़ी, जिसके नीचे कई सारे लोग खड़े थे सब सफ़ेद कपड़े पहने हुए थे. हमारे देखते ही देखते सब के सब आचानक गायब भी हो गए. जब हम लोगों ने सुबह कमरे के मालिक से बोला तो उन्होंने कहा की ज्यादा रात को कमरे के बाहर मत निकला करो. और उन सब चीजों पर ध्यान मत दो. फिर हम लोग सब भूल गए, कई दिनों के बाद फिर हमारे साथ ऐसा ही हुआ, दरअसल, रात को हम लोग एक शादी से वापस लौट रहे थे, रात ज्यादा हो चुकी थी. जब हम लोग कब्रिस्तान के पास पहुंचे तो देखा, चोर ओर अँधेरा छाया हुआ था. तेज़ हवा चल रही थी. कुछ आजीब आजीब सी आवाजे आ रही थीं.
हम लोग बिना डरे अपने कमरे की तरफ जा रहे थे, तभी हमें लगा की कई सारे लोग हमारे पीछे-पीछे आ रहे हैं, जब हम पीछे मुड़ कर देखा तो वहां कोई भी नहीं था. फिर कुछ दूर जाने के बाद हमें एक बुढ़िया दिखाई दी, जो एक बड़े से पीपल के पेड के नीचे बैठी हुई थी. जब हम उसके पास गये तो उसका चेहरा बेहद डरावना था. उसके मुहं से खून टपक रहा था, आंखे बाहर निकली हुई थीं. हाँथ की जगह पैर और पैर की जगह हाँथ लगा हुआ था. उसे देख कर हम दोनों वहीं बेहोश हो गए,, जब होश आया तो हम लोग अपने कमरे में थे, सब कुछ ठीक था, लेकिन मेरा दोस्त का दिमाग कुछ ठीक नहीं था, मूझे भी बुखार था, हम लोग वापस अपने घर आ गए. हम तो ठीक हो गए, लेकिन मेरा दोस्त पागल हो गया.
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